एक केंद्र प्रायोजित योजना-"सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारीकरण की योजना" (FME) असंगठित क्षेत्र के लिए संपूर्ण भारत पर लागू की गई है, जिसका परिव्यय 10,000 करोड़ रुपये है। भारत सरकार और राज्यों द्वारा 60:40 के अनुपात में इस व्यय को साझा किया जाएगा। उद्देश्य सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए वित्त की उपलब्धता में वृद्धि। लक्षित उद्यमों के राजस्व में वृद्धि। खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के अनुपालन को बढ़ाना समर्थन प्रणालियों की क्षमता को मजबूत करना। असंगठित क्षेत्र से औपचारिक क्षेत्र में बदलाव। महिला उद्यमियों और आकांक्षी जिलों पर विशेष ध्यान। जनजातीय जिलों में लघु वनोपजों पर विशेष ध्यान कार्यान्वयन अवधि योजना 2020-21 से 2024-25 तक 5 साल की अवधि में लागू की जाएगी। 2,00,000 सूक्ष्म उद्यमों को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी की सहायता देने का लक्ष्य है। पात्रता योजना संपूर्ण भारत के लिए है। एकल सूक्ष्म इकाइयों को सहायता सूक्ष्म उद्यमों को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी दी जाएगी। पात्र परियोजना लागत का 35%, 10 लाख रुपये की उच्चतम सीमा के साथ लाभार्थी का योगदान न्यूनतम 10% होगा और शेष ऋण के रुप में होगा। डीपीआर और तकनीकी उन्नयन के लिए ऑन-साइट कौशल प्रशिक्षण ३. एफपीओ/एसएचजी / सहकारी समितियों को सहायता: एसएचजी को प्रारंभिक पूंजी (@4 लाख रुपये प्रति एसएचजी) सदस्यों को कार्यशील पूंजी और छोटे औजारों ऋण सहायता एवं छोटी जरुरतों के लिए । बैकवर्ड / फारवर्ड लिंकेज के लिए, सामान्य बुनियादी ढांचा, पैकेजिंग, विपणन और ब्रांडिंग के लिए अनुदान। कौशल प्रशिक्षण और हैंडहोल्डिंग समर्थन। क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी। किससे संपर्क करें राज्य स्तर पर राज्य सरकार द्वारा नामित नोडल विभाग द्वारा इसे लागू किया जाएगा । ऑनलाइन पंजीकरण के लिए एक राष्ट्रीय पोर्टल होगा।